GSEB Class 10 Social Science Important Questions Chapter 2 भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ
January 29, 2022 / By Bhagya
Gujarat Board GSEB Class 10 Social Science Important Questions Chapter 2 भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ Important Questions and Answers.
GSEB Class 10 Social Science Important Questions Chapter 2 भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए:
प्रश्न 1.
भारत का प्रथम यंत्र कौन-सा है ?
(A) चक्र
(B) कुलहाड़ी
(C) कैंची
(D) घोडागाड़ी
उत्तर:
(A) चक्र
प्रश्न 2.
संगीत रत्नाकर ……………………… ने लिखी थी ।
(A) पंडित अहोबल
(B) पं. नारद
(C) पं. सारंगदेव
(D) बैजू बावरा
उत्तर:
(C) पं. सारंगदेव
प्रश्न 3.
कथकली नृत्य का संबंध किस राज्य से है ?
(A) केरल
(B) कर्णाटक
(C) तमिलनाडु
(D) आंध्र प्रदेश
उत्तर:
(A) केरल
प्रश्न 4.
गरबियों को कृष्ण भक्ति के साथ किसने जोड़ा है ?
(A) मीराबाई
(B) नरसिंह मेहता
(C) अखा
(D) दयाराम
उत्तर:
(D) दयाराम
प्रश्न 5.
‘देवासुर संग्राम’ ग्रन्थ किसने लिखा है ?
(A) भरत मुनि
(B) कालिदास
(C) भास
(D) भारवी
उत्तर:
(A) भरत मुनि
GSEB Class 10 Social Science Important Questions Chapter 2 भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ
प्रश्न 6.
‘नाट्य शास्त्र’ की रचना किसने की थी ?
(A) भरतमुनि
(B) कालिदास
(C) भास
(D) भारवी
उत्तर:
(A) भरतमुनि
प्रश्न 7.
इनमें से कौन-सी कृति महाकवि भास की महाभारत पर आधारित नहीं है ?
(A) कर्णभार
(B) उरुभंग
(C) दूतवाक्यम्
(D) अभिज्ञान शाकुंतलम्
उत्तर:
(D) अभिज्ञान शाकुंतलम्
प्रश्न 8.
कालिदास का सबसे प्रसिद्ध नाटक कौन-सा है ?
(A) देवासुर संग्राम
(B) कर्णभार
(C) उरुभंग
(D) अभिज्ञान शाकुंतलम्
उत्तर:
(D) अभिज्ञान शाकुंतलम्
प्रश्न 9.
मणिपुरी नृत्य में पहने जानेवाले हरे रंग के घाघरे को क्या कहते हैं ?
(A) जुमान
(B) कुमान
(C) दमान
(D) कर्णभार
उत्तर:
(B) कुमान
प्रश्न 10.
नृत्य के देवाधिदेव कौन माने जाते है ?
(A) विष्णु
(B) नटराज
(C) ब्रह्माजी
(D) गणेश जी
उत्तर:
(B) नटराज
GSEB Class 10 Social Science Important Questions Chapter 2 भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ
प्रश्न 11.
संगीत मकरंद की रचना कब की गयी थी ?
(A) ई.स. पूर्व 900
(B) ई.स. 900
(C) ई.स. 1665
(D) ई.स. 1005
उत्तर:
(B) ई.स. 900
प्रश्न 12.
संगीत रत्नाकर किसने लिखा था ?
(A) पं. नारद
(B) पं. सारंगदेव
(C) पं. अहोबल
(D) तानसेन
उत्तर:
(B) पं. सारंगदेव
प्रश्न 13.
संगीत मकरंद में कितने प्रकार की विणा का वर्णन है ?
(A) 9
(B) 10
(C) 19
(D) 29
उत्तर:
(C) 19
प्रश्न 14.
संगीत मकरंद में कितने प्रकार के ताल का वर्णन है ?
(A) 19
(B) 61
(C) 101
(D) 129
उत्तर:
(C) 101
प्रश्न 15.
संगीत पारिजात ग्रन्थ की रचना कब हुई थी ?
(A) ई.स. 900
(B) ई.स. 1665
(C) ई.स. 1770
(D) ई.स. 1210 में
उत्तर:
(B) ई.स. 1665
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प्रश्न 16.
संगीत पारिजात की रचना किसने की थी ?
(A) पं. सारंगदेव
(B) पं. नारद
(C) पं. अहोबल
(D) तानसेन
उत्तर:
(C) पं. अहोबल
प्रश्न 17.
संगीत मकरंद में कितने प्रकार के स्वरों का वर्णन है ?
(A) 9
(B) 19
(C) 29
(D) 101
उत्तर:
(C) 29
प्रश्न 18.
जरीकाम के लिए गुजरात का कौन-सा शहर प्रसिद्ध है ?
(A) अहमदाबाद
(B) सुरत
(C) बड़ोदरा
(D) जामनगर
उत्तर:
(C) बड़ोदरा
प्रश्न 19.
भवाई नृत्य कितने वर्ष पुराना है ?
(A) 500
(B) 700
(C) 850
(D) 900
उत्तर:
(B) 700
प्रश्न 20.
पढार नृत्य किस जिले का प्रसिद्ध है ?
(A) आणंद
(B) बड़ोदरा
(C) सुरत
(D) सुरेन्द्रनगर
उत्तर:
(D) सुरेन्द्रनगर
GSEB Class 10 Social Science Important Questions Chapter 2 भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ
प्रश्न 21.
‘भरतनाट्यम्’ नृत्य किस स्थान से संबंधित है ?
(A) चैन्नई
(B) तांजोर
(C) जयपुर
(D) तूतीकोरम
उत्तर:
(B) तांजोर
प्रश्न 22.
इनमें से किसका संबंध भरतनाट्यम् से है ?
(A) हेमामालिनी
(B) वैजयंतिमाला
(C) गोपीकृष्ण
(D) ये तीनों ही
उत्तर:
(D) ये तीनों ही
प्रश्न 23.
कुचीपुड़ी की रचना किस सदी में हुई थी ?
(A) 14वीं
(B) 15वीं
(C) 16वीं
(D) 17वीं
उत्तर:
(B) 15वीं
प्रश्न 24.
कुचीपुड़ी नृत्य का संबंध किस राज्य से है ?
(A) आंध्रप्रदेश
(B) तमिलनाडु
(C) केरल
(D) हैदराबाद
उत्तर:
(A) आंध्रप्रदेश
प्रश्न 25.
राजस्थान का कौन-सा शहर जड़ाऊ कला के लिए प्रसिद्ध है ?
(A) अजमेर
(B) बिकानेर
(C) कोटा
(D) जोधपुर
उत्तर:
(B) बिकानेर
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प्रश्न 26.
गुजरात में अकीक कहाँ से प्राप्त होता है ?
(A) अहमदाबाद
(B) सुरत
(C) खंभात
(D) ये तीनों ही
उत्तर:
(A) अहमदाबाद
प्रश्न 27.
गुजरात का कौन-सा स्थान अकीक काम के लिए प्रसिद्ध है ?
(A) खंभात
(B) राणपुर
(C) सुरत
(D) बड़ोदरा
उत्तर:
(A) खंभात
प्रश्न 28.
वेद कितने है ?
(A) 4
(B) 3
(C) 5
(D) 6
उत्तर:
(A) 4
प्रश्न 29.
भारतीय संगीत में कितने स्वर होते है ?
(A) 5
(B) 6
(C) 7
(D) 9
उत्तर:
(C) 7
प्रश्न 30.
भारतीय संगीत के कितने राग है ?
(A) 5
(B) 6
(C) 7
(D) 9
उत्तर:
(A) 5
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प्रश्न 31.
कौन-सा ग्रंथ संगीत के अंगों को समझने का बेजोड़ ग्रन्थ है ?
(A) संगीत मकरंद
(B) संगीत रत्नाकर
(C) संगीत पारिजात
(D) संगीत सरीता
उत्तर:
(B) संगीत रत्नाकर
प्रश्न 32.
भरत में …………….. कलाएँ प्रचलित है ।
(A) 64
(B) 46
(C) 56
(D) 101
उत्तर:
(A) 64
प्रश्न 33.
बाँधनी वस्त्र परिधान का संबंध किस राज्य से है ?
(A) आंध्र प्रदेश
(B) बिहार
(C) गुजरात
(D) राजस्थान
उत्तर:
(D) राजस्थान
प्रश्न 34.
प्राचीन भारत का कौन-सा नगर मलमल के लिए प्रसिद्ध था ?
(A) करांची
(B) जयपुर
(C) ढाका
(D) मदुराई
उत्तर:
(C) ढाका
प्रश्न 35.
पाटोला की कला कितने वर्ष पुरानी है ?
(A) 800
(B) 500
(C) 850
(D) 675
उत्तर:
(C) 850
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प्रश्न 36.
भरत कार्य के लिए गुजरात की कौन-सी जाति सुप्रसिद्ध है ?
(A) बन्नी
(B) जत
(C) कत
(D) नट
उत्तर:
(B) जत
प्रश्न 37.
भरत कार्य के लिए गुजरात का कौन-सा क्षेत्र प्रसिद्ध है ?
(A) कानम
(B) चरोतर
(C) जत
(D) बन्नी
उत्तर:
(D) बन्नी
प्रश्न 38.
गुजरात के कौन-से स्थान बांधनी कार्य के लिए प्रसिद्ध है ?
(A) जामनगर और जेतपुर
(B) भुज और मांडवी
(C) भुज और राजकोट
(D) B और C
उत्तर:
(D) B और C
उचित शब्दों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
1. मानव और ……………… के बीच अधिक प्राचीन संबंध है ।
उत्तर:
(मिट्टी)
2. प्राचीन नगर लांघणज ……………………………… जिले में है ।
उत्तर:
(मेहसाणा)
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3. संगीत के अंगों को समझने का बेजोड़ ग्रन्थ ………………………….. को माना जाता है ।
उत्तर:
(संगीत रत्नाकर)
4. पंडित सारंगदेव ……………………… के रहनेवाले थे ।
उत्तर:
(दोलताबाद)
5. ………………………… का प्रभाव बढ़ने से रास अधिक लोकप्रिय बना है ।
उत्तर:
(वैष्णव संप्रदाय)
6. ………………………… ने नाट्यशास्त्र की रचना की थी ।
उत्तर:
(भरत मनि)
7. भवाई नृत्य ……………………. द्वारा शुरू किया गया था ।
उत्तर:
(अताई ठाकर)
8. भवाई नृत्य को ………………………….. युग में प्रोत्साहन मिला था ।
उत्तर:
(सोलंकी)
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9. मेरायो के नृत्य में ………………………….. और ……………………….. घाँस के तोरण बनते है ।
उत्तर:
(सरखड़, झुंझाली)
10. अभिनव दर्पण ………………………. ने लिखा था ।
उत्तर:
(नंदीकेश्वर)
11. ……………………. नृत्य में भारतीय मुद्राएँ की जाती है ।
उत्तर:
(कुचीपुड़ी)
12. हड़प्पीय संस्कृति के अवशेषों में ………………………… वर्ष पुराने चित्र प्राप्त हुए है ।
उत्तर:
(5000)
13. …………………………. वेद को संगीत की गंगोत्री माना जाता है ।
उत्तर:
(साम)
14. संगीत में …………………….. और …………………… का समावेश होता है ।
उत्तर:
(गायन, वादन)
15. ……………………. ने संगीत रत्नाकर को संगीत का बेजोड़ ग्रन्थ माना है ।
उत्तर:
(पं. विष्णुनारायण भातखंड)
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16. बालक को माता-पिता द्वारा प्राप्त शारीरिक लक्षण ……………….. विरासत कहते हैं ।
उत्तर:
(जैविक)
17. समग्र भारत में 21 जून को …………………….. दिवस मनाया जाता है ।
उत्तर:
(विश्व योग)
18. भाटोल की कला का ……………………… युग स्वर्ण युग था ।
उत्तर:
(सोलंकी)
19. गुजरात के …………………….. के बन्नी प्रदेश की जत जाति भरत कला के लिए प्रसिद्ध है ।
उत्तर:
(कच्छ)
निम्नलिखित शब्द समझाइए:
1. टेराकोटा – कच्ची मिट्टी से पके हुए बर्तनों को टेराकोटा कहा जाता है ।
2. मशक – प्राचीन समय में कुए से पानी निकालने की चमड़े से बनी वस्तु ।
3. गरबा – गरबा शब्द ‘गर्भ दीप’ से बना है जिसमें घड़े को रंगकर, दिया रखकर, उसे सिर पर रखकर गोलाकार नृत्य करना गरबा है ।
4. रास – रास अर्थात् गोलाकार घूमते हुए गायन के साथ नृत्य करना ।
5. नाट्यशास्त्र/नाट्य – मनोरंजन के साथ जीवन के प्रसंगों का चित्रण करना नाट्यशास्त्र कहलाता है ।
6. नृत्य – ताल और लय के साथ सौंदर्य की अनुभूति के माध्यम को नृत्य कहते हैं ।
7. कताई – कला – कपास की पैनी के तार खेंचकर उसे मोड़ देकर एक-दूसरे की पकड़ में जोड़कर लम्बा धागा तैयार करने की कला को कताई कहते हैं ।
8. मेरायो नृत्य – बनासकांठा के वाव क्षेत्र में घास की तौरण जैसे झूमर बाँधकर ढ़ोल की आवाज के साथ तलवार के दाव-पेच द्वारा जो नृत्य किया जाता है, उसे मेरायो नृत्य कहते हैं ।
9. अकीक – नदियों के किनारे पर पाया जानेवाला कार्नेलियम पत्थर जो सिलिका मिश्रित – भूरे और सफेद रंग का (केल्सिडोनिक) चमकदार पत्थर होता है ।
10. चित्रकला – रंग और रेखाओं के माध्यम से प्रकृति के जड़ और चेतन तत्त्वों का अनुसरण करके कलाकार के मन के भाव व्यक्त करने की कला चित्रकला है ।
11. सांस्कृतिक विरासत – मनुष्य अपनी योग्यता, बुद्धिशक्ति, कला, कौशल्य द्वारा जो कुछ प्राप्त किया है, सर्जन किया है उसे सांस्कृतिक विरासत कहते हैं ।
12. पाटोला – पाटोला पाटण का एक प्रसिद्ध रेशमी वस्त्र परिधान है जिसे दोनों तरफ पहना जाता है ।
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नीचे दिए गये विभाग ‘A’ से विभाग ‘B’ के साथ सही क्रम से जोडिए:
1.
विभाग-A विभाग-B
1. संगीत मकरंद 1. अमीर खुशरो
2. संगीत रत्नाकर 2. पंडित अहोबल
3 संगीत पारिजात 3. पंडित सारंगदेव
4. तूती-ए-हिन्द 4. पंडित नारद
5. नाट्यशास्त्र 5. भरतमुनि
उत्तर:
विभाग-A विभाग-B
1. संगीत मकरंद 4. पंडित नारद
2. संगीत रत्नाकर 3. पंडित सारंगदेव
3 संगीत पारिजात 2. पंडित अहोबल
4. तूती-ए-हिन्द 1. अमीर खुशरो
5. नाट्यशास्त्र 5. भरतमुनि
2.
विभाग-A विभाग-B
1. कांजीवरम 1. पाटोला
2. बांधनी 2. ढाका
3. मलमल 3. राजस्थान
4. पाटण 4. साडी
5. कश्मीर 5. गलीचा
उत्तर:
विभाग-A विभाग-B
1. कांजीवरम 4. साडी
2. बांधनी 3. राजस्थान
3. मलमल 2. ढाका
4. पाटण 1. पाटोला
5. कश्मीर 5. गलीचा
GSEB Class 10 Social Science Important Questions Chapter 2 भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ
3.
विभाग-A विभाग-B
1. भरतनाट्यम् नृत्य 1. तमिलनाडु
2. कुचीपुड़ी नृत्य 2. आंध्र प्रदेश
3. कथकली नृत्य 3. केरल
4. मणिपुरी नृत्य 4. मणिपुर
उत्तर:
विभाग-A विभाग-B
1. भरतनाट्यम् नृत्य 1. तमिलनाडु
2. कुचीपुड़ी नृत्य 2. आंध्र प्रदेश
3. कथकली नृत्य 3. केरल
4. मणिपुरी नृत्य 4. मणिपुर
4.
विभाग-A विभाग-B
1. गरबा 1. कालिदास
2. भावप्रधान नाटक 2. भरतमुनि
3. देवासुर संग्राम 3. भवाई
4. विक्रमोवीयम् 4. गरबा
उत्तर:
विभाग-A विभाग-B
1. गरबा 4. गरबा
2. भावप्रधान नाटक 3. भवाई
3. देवासुर संग्राम 2. भरतमुनि
4. विक्रमोवीयम् 1. कालिदास
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो वाक्यों में दीजिए:
प्रश्न 1.
प्राचीन समय में मिट्टी से कौन-कौन सी वस्तुएँ बनती थी ?
उत्तर:
प्राचीन समय में मिट्टी से खिलौने, घड़े, कुल्हड़, हाँडी, दिए, चूल्हे तथा अनाज संग्रह की कोठियाँ बनती थी ।
प्रश्न 2.
भारत में प्राचीन काल की मिट्टी की वस्तुओं के अवशेष कहाँ से प्राप्त हुए है ?
उत्तर:
लोथल, मोहे-जो-दड़ो तथा हड़प्पा संस्कृति से मिट्टी की वस्तुओं के अवशेष प्राप्त हुए है ।
प्रश्न 3.
हाथ से बने मिट्टी के प्राचीन बर्तनों के अवशेष कहाँ से प्राप्त हुए है ?
उत्तर:
दक्षिण भारत में नागार्जुन कोड और गुजरात के लाँघणज से प्राप्त हुए है ।
प्रश्न 4.
प्राचीन समय में चमड़े से बनी पानी के उपयोग की दो वस्तुओं के नाम लिखिए ।
उत्तर:
प्राचीन समय में कुएँ से पानी निकालने के लिए मशक और पानी ले जाने के लिए चमड़े की पखाल का उपयोग होता था ।
प्रश्न 5.
कथकली को किन लोगों ने देश-विदेशों में पहचान दी है ?
उत्तर:
श्री वल्लथोल, कलमंडलम, कृष्ण प्रसाद और शिवारमन् आदि ने कथकली को पहचान दी है ।
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प्रश्न 6.
कथकली का नाम किसके पीछे पड़ा है ?
उत्तर:
कथकली शब्द पौराणिक महाकाव्यों, महाभारत के प्रसंगों और संस्कृत मलयालम मिश्रित नाटकों पर पड़ा है ।
प्रश्न 7.
रास नृत्य में कैसे वस्त्र पहने जाते है ?
उत्तर:
रास खेलते समय स्त्रियाँ भरतगुंथन से भरे चणिया-चोली और पुरुष केडिया-धोती के परंपरागत पोशाक पहनते है ।
प्रश्न 8.
गुजराती नाट्यकला में किन लोगों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है ?
उत्तर:
जयशंकर सुंदरी, अमृत नायक, बापुलाल नायक, प्राणसुख नायक, दिना पाठक, जशवंत ठाकर, उपेन्द्र त्रिवेदी, प्रवीण जोषी, सरिता जोषी, दीपक घीवाला आदि ।
प्रश्न 9.
भास की महाभारत पर आधारित कृतियाँ कौन-कौन सी है ?
उत्तर:
कर्णभार, उरूभंग और दूतवाक्यम् महाभारत पर आधारित है ।
प्रश्न 10.
मणिपुरी नृत्य के प्रसिद्ध नृत्यकार कौन-कौन है ?
उत्तर:
आमोबीसिंग आतोम्बोसिंग, गुरु विपिन सिन्हा, नयना झवेरी, निर्मल मेहता आदि ।
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प्रश्न 11.
भवाई नृत्य में कौन-से वेश धारण किये जाते है ?
उत्तर:
भवाई नृत्य में रामदेव, झंडा झूलने का वेश, कुजोड़ा का वेश धारण किया जाता है ।
प्रश्न 12.
भवाई नृत्य की क्या विशेषता है ?
उत्तर:
कम खर्च के साथ लोकशिक्षण और मनोरंजन करना है ।
प्रश्न 13.
डाँग के कौन से आदिवासी नृत्य की शैलियाँ प्रचलित है ?
उत्तर:
‘माली का चालो’ और ‘ठाकर्या चालो’ नृत्य डांग में प्रसिद्ध है ।
प्रश्न 14.
कथक नृत्य के मुख्य नृत्यकार कौन-कौन है ?
उत्तर:
पंडित श्री बिरजू महाराज, सितारादेवी और कुमुदिनी लाखिया आदि ।
प्रश्न 15.
भरतनाट्यम् से संबंधी कौन-कौन से ग्रन्थ है ?
उत्तर:
भरत मुनि रचित ‘नाट्यशास्त्र’ और नंदीकेश्वर रचित ‘अभिनवदर्पण’ भरतनाट्यम् पर आधारित है ।
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प्रश्न 16.
भरतनाट्यम् के मुख्य नृत्यकार कौन-कौन है ?
उत्तर:
अभिनेत्रियाँ हेमामालिनी और वैजयंतिमाला मुख्य नृत्यकार है ।
प्रश्न 17.
कुचीपुड़ी नृत्य के मुख्य नृत्यकार कौन-कौन है ?
उत्तर:
गुरु प्रहलाद शर्मा, राजा रेड्डी, यामिनी रेड्डी, शोभा नायडु आदि कुचीपुड़ी के मुख्य नृत्यकार है ।
प्रश्न 18.
गुजरात में अकीक कहाँ पाया जाता है ?
उत्तर:
गुजरात में अहमदाबाद, सुरत, खंभात और राणपुर क्षेत्रों में अकीक प्राप्त होता है ।
प्रश्न 19.
भारतीय संगीत विश्व में किस दृष्टि से अलग है ?
उत्तर:
भारतीय संगीत विश्व में ताल, लय और स्वरों की दृष्टि से अलग है ।
प्रश्न 20.
भारतीय संगीत के कौन-से पाँच राग है ?
उत्तर:
भारतीय संगीत के पाँच राग (1) श्री (2) दीपक (3) हिंडोल (4) मेध और (5) भैरवी है ।
GSEB Class 10 Social Science Important Questions Chapter 2 भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ
प्रश्न 21.
सांस्कृतिक विरासत किसे कहते हैं ?
उत्तर:
मनुष्य ने अपनी बुद्धि, योग्यता, कला, ज्ञान, कौशल्यता से जो कुछ विकसित किया है और सर्जित किया है उसे सांस्कृतिक विरासत कहते हैं ।
प्रश्न 22.
प्राचीन भारत की चौसट कलाओं में अग्रिम कलाएँ कौन-सी है ?
उत्तर:
प्राचीन भारत की चौसठ कलाओं में हस्तकला, कारीगरी, हुन्नर, चित्र, संगीत, नाट्य और नृत्य श्रेष्ठ मानी जाती है ।
प्रश्न 23.
प्राचीन भारत के कौन-कौन से वस्त्र प्रसिद्ध थे ?
उत्तर:
प्राचीन भारत में राजस्थान की बांधनी, पाटण का पाटोला, कांजीवरम की साड़िया और कश्मीर के हस्तकला के गलीचे प्रसिद्ध थे ।
प्रश्न 24.
ढाका के मलमल की क्या विशेषता थी ?
उत्तर:
ढाका की मलमल का ताका माचिस की डिब्बी में समा जाता था और साड़ी अंगूठी से गुजर जाती थी ।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त में दीजिए:
प्रश्न 1.
संगीत मकरंद का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
संगीतशास्त्र के ज्ञाता पंडित नारद ने ई.स. 900 के समय दरम्यान की थी ।
इस ग्रन्थ में 19 प्रकार की वीणा और 101 प्रकार के ताल का वर्णन है ।
प्रश्न 2.
संगीत पारिजात की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
ई.स. 1665 में पं. अहोबल ने उत्तरी हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति के लिए खूब ही महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ की रचना की थी ।
उन्होंने प्रत्येक राग अन्य राग से होने और उसका स्वतंत्र अस्तित्व होने की जानकारी दी थी ।
इसमें 29 प्रकार के स्वरों का वर्णन है ।
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प्रश्न 3.
भारत के जरीकाम के विकास की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
जरीकला भारत में प्राचीन समय से पायी जाती है ।
चाँदी और सोने के तार के रूप में बनाकर उसका उपयोग भरत, बुनाई, कला द्वारा कीमती वस्त्रों को सजाया जाता था ।
भारत में जरीकाम के हुन्नर के लिए सुरत शहर प्रसिद्ध है ।
साड़ी, बैस, सूट, विवाह के वस्त्रों में जरी की किनारी लगाने के लिए सूरत के कारीगर प्रसिद्ध है
प्रश्न 4.
कथक नृत्य की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
‘कथन करे सो कथक कहावे’ वाक्य पर से कथक शब्द बना है ।
महाभारत में श्रीकृष्ण और गोपियों के साथ नृत्यों की कला पर आधारित कथक नृत्य को वैष्णव संप्रदाय की शृंगार भक्ति के साथ उत्तर भारत में विकास हुआ था ।
इसमें पैर पर गोल-गोल घूमना और नृत्य के प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाता है ।
नृत्य में स्त्रियाँ चुड़ीदार पायजामा और ऊपर घेरदार वस्त्र पहनते है ।
पंडित श्री बिरजु महाराज, सितारा देवी और कुमुदिनी लाखिया ने इस कला को जीवंत रखा है ।।
प्रश्न 5.
कुचीपुड़ी नृत्य की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
इस नृत्य का विकास 15वी सदी में हुआ था ।
मुख्यतः स्त्री सौंदर्य के वर्णन पर आधारित और स्त्रियों और पुरुषों दोनों द्वारा किया जानेवाला नृत्य में भारतीय नृत्य की मुद्राएँ बनायी जाती है ।
इस नृत्य का संबंध आंध्र प्रदेश से है । गुरु प्रहलाद शर्मा, राजा रेड्डी, शोभा नायडु, यामिनी रेड्डी इसके प्रसिद्ध नृत्यकार है ।
प्रश्न 6.
भारत की जड़ाऊ कला के विकास की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
जड़ाऊ कला भारत की एक प्राचीन कला है ।
भारत में राजा-महाराजा, सम्राट, अन्य शासक और उस समय के श्रीमंत आदि जो स्वर्ण अलंकार धारण करते थे उसमें हीरे, मोती, माणेक जैसे कीमती रत्न जड़वाते थे ।
गले का हार, बाजुबंद, कड़े, मुकट, अंगूठी, नथ आदि में रत्न जड़वाते है ।
विशेष निपुणता धारण करनेवाले कारीगर इस कला में निपुण थे ।
राजस्थान का बीकानेर जड़ाऊ कला के लिए प्रसिद्ध है ।
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प्रश्न 7.
पाटोला की कला की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
पाटण में बननेवाला पाटोला एक विशेष प्रकार का परिधान है ।
पाटोला की कला 850 वर्ष पुरानी है ।
यह रेशमी वस्त्र है जिसे दोनों तरफ से पहना जाता है ।
पाटोला वर्षों तक चलता है, उसका रंग नहीं जाता है और यह फटता नहीं है ।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर मुद्दासर दीजिए:
प्रश्न 1.
भारत की चित्रकला के विकास की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
सभी कलाओं में श्रेष्ठ चित्रकला मानी जाती है ।
रंग और रेखाओं के माध्यम से कला और सौन्दर्य का रसपान कराती चित्रकला में प्रकृति के जड़ और चेतन स्वरूपों में रहे विविध भावों का दर्शन कराने की क्षमता है ।
लगभग 5000 वर्ष पुरानी हड़प्पीय संस्कृति के अवशेषों में से भारतीय चित्रकला के सबूत मिले है ।
पुरातत्त्व विभाग द्वारा समय-समय पर होनेवाले उत्खननों में भी भारतीय चित्रकला के नमूने मिले है ।
पाषाणयुग के आदिवासी चित्रों के गुफा चित्रों में पशु-पक्षियों का आलेखन है ।
हड़प्पा के लोग मिट्टी के बर्तनों पर फूल-पौधों और भौमितिक आलेखन करते थे ।
मध्यप्रदेश में हाथी, गेन्डे, हिरण इत्यादि के चित्र प्राप्त हुए है । अजंता-इलोरा की गुफाओं के चित्र भारतीय कला के बेजोड़ नमूने है ।
भारत में पारंपरिक रूप से शुभ अवसरों पर स्वास्तिक, कलश, गणेश के चित्र और रंगोलियाँ बनाई जाती थी ।
प्रश्न 2.
भारत की काष्ठकला की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
मानव का शुरुआत से ही वृक्षों और वन्य जीवों के साथ संबंध रहा है ।
पहले ईंधन और मकान बनाने में ।
कड़ी से मूर्तियाँ, बालकों के खिलौने, खिड़की, दरवाजे, चारपाई, चौकी, झूले, अलमारी, सिंहासन, कुर्सियाँ, जालियाँ, अटारियाँ आदि पर खुदाई करके (शिल्प करके) बनाते थे ।
गुजरात में संखेडा फर्निचर, लकड़ी के झूले तथा ईडर खिलौनों के लिए प्रसिद्ध है ।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए:
प्रश्न 1.
नाट्य कला की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
मनोरंजन के साथ संस्कार भारतीय नाट्यकला की विशेषता रही है ।
नाटक का संचालन करनेवाले सूत्रधार और समझ के साथ मनोरंजन करवाते विदूषक की जोड़ी के साथ नाटक भारत की एक महत्त्वपूर्ण पहचान है ।
भरतमुनि द्वारा रचित ‘नाट्यशास्त्र’ ने नाट्यकला को प्रचलित किया है ।
नाट्यकला यह नाट्यलेखन और मंचन द्वारा रंगमंच पर दृश्य-श्राव्य और अभिनय के त्रिवेणी संगम के साथ बालवृद्धों का मनोरंजन और लोकशिक्षण करती भारत की प्राचीन कला है ।
इस कला में सभी कलाओं का समन्वय होने का वर्णन भरतमुनि ने किया – ‘ऐसा कोई शास्त्र नहीं, ऐसी कोई शिल्प नहीं, ऐसी कोई विद्या नहीं, ऐसा कोई कर्म नहीं, जो नाट्य कला में नहीं हो ।’
भरत मुनि रचित प्रथम नाट्य कथानक ‘देवासुर संग्राम’ था ।
संस्कृत साहित्य में महाकवि भास ने महाभारत आधारित ‘कर्णभार’, ‘ऊरूभंग’ और ‘दूतवाक्यम्’ जैसे नाटकों की विरासत हमें दी है ।
जबकि महाकवि कालिदास के ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’, ‘विक्रमोवर्शीयम्’ तथा ‘मालविकाग्निमित्रम्’ नाटक सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ है ।
प्राचीन समय में नाट्यकला क्षेत्र में अनेक नाट्यकार हुए, जिन्होंने संस्कृत नाट्यकला को समृद्ध बनायी है ।
गुजराती नाट्यकला में जयशंकर तक के नाम मुख्य माने जाते है ।
अमृत नायक, बापुलाल नायक, प्राणसुख नायक, दिना पाठक, जशवंत ठाकर, उपेन्द्र त्रिवेदी, प्रवीण जोशी, सरिता जोशी, दीपक घीवाला आदि को महत्त्वपूर्ण नाट्यकार माने गये है ।
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प्रश्न 2.
गुजरात के अन्य प्रकार के विशिष्ट नृत्यों की संक्षिप्त में जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
(1) गोफगूंथन नृत्य: यह नृत्य ढोल के बिना संगीत के ताल, मांडवा, खंभा या वृक्ष के साथ रस्सी बांधकर उसके छोर के नीचे समूह में खड़े नृत्यकार पकड़कर (एक हाथ में छोर – दूसरे हाथ में डाँडिया) बेल के आकार में एक अंदर और एक बाहर इस तरह गोल घूमते हुए गूंथन बाँधते है और उसे छोड़ते है ।
(2) सीदियों का धमाल नृत्य: सीदी मूलत: अफ्रीका के है और वर्तमान में गिर के मध्य में जांबुर में बसे सिदियों का यह नृत्य है । मशीरा (नारियल के खोल में कोडिया भरकर उसके ऊपर कपड़ा बाँधते है ।) तालबद्ध खड़खड़ाट के साथ मोरपंख का झुण्ड और छोटे-छोटे ढोल के साथ गोलाकार घूमकर गाते हुए नृत्य करते है । हो-हो के आरोह-अवरोह के साथ गाया जाता यह नृत्य पहाड़ी और जंगल में पड़छंद उठते हो ऐसा लगता है । पशु-पक्षियों की आवाज करते हुए समूह में नृत्य करते है ।
(3) मेरायो नृत्य, पढ़ार नृत्य और कोलियों व मेर का नृत्य : बनासकांठा के वाव क्षेत्र में सरखड और झुंझाली जैसे ऊँचे घास से तोरण बांधकर, मेरायो बांधकर ढोल की आवाज के साथ तलवार के दाव-पेच जैसा नृत्य मेरायो नृत्य कहते हैं । सुरेन्द्रनगर में पढ़ार जाति के लोग पढ़ार नृत्य करते है, जो डांडिया और मंजीरा के साथ ताल और लय से होता है । शरीर पर जमीन सरसों लेकर बैठे होते है । सागर की लहरों पर हिलोरे लेती नाव जैसे दृश्य बनाते है ।
सौराष्ट्र के कोलियों का कोलीनृत्य में वे सिर पर मधासिया, टेड़ी गोल पकड़ी और उसके छेड़े में हरे रंग का पट्टा और रंगीन भेट पहनकर यह नृत्य करते है । इसी तरह सौराष्ट्र में मेर तथा भरवाड़ जाति के नृत्य भी प्रसिद्ध है ।
प्रश्न 3.
प्राचीन भारत में संगीत कला के क्षेत्र में हुए विकास की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
भारतीय संगीत अन्य देशों से ताल, लय और स्वरों की दृष्टि से अलग है ।
सामवेद को संगीत की गंगोत्री माना जाता है । सामवेद की ऋचाएँ भी संगीत के साथ तालबद्ध गानी होती है ।
संगीत में गायन और वादन का समावेश होता है ।
भारतीय संगीत में सा, रे, ग, म, प, ध, नी ये 7 स्वर होते है ।
भारतीय संगीत के दो प्रकार (1) लोक संगीत (2) शास्त्रीय संगीत है ।
भारतीय संगीत के 5 राग (1) श्री (2) दीपक (3) हिंडोल (4) मेघ और (5) भैरवी है ।
ये पाँचों राग भगवान शंकर के पँचमुख से उत्पन्न हुए माने जाते है ।
अलाउद्दीन के समय शायरी और संगीत के क्षेत्र में योगदान के कारण अमीर खुशरो को तूती-ए-हिन्द की उपमा दी गयी थी ।
15वीं सदी और 16वी सदी में भक्ति आन्दोलन के समय सुरदास, कबीर, चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई और नरसिंह मेहता ने भजन, कीर्तन द्वारा भारत में एक भक्तिमय वातावरण उत्पन्न किया था ।
15वीं सदी में बाबा हरिदास के शिष्य बैजु बावरा तथा गुजरात में सगी और जुड़वा बहनों ताना और रीरी ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था ।
संगीत की पुस्तकें:
(1) संगीत मकरंद: इस ग्रन्थ की रचना पं. नारद ने ई.स. 900 के अरसे में की थी ।
* इस ग्रन्थ में 19 प्रकार की वीणा और 101 प्रकार के ताल का वर्णन है ।
(2) संगीत रत्नाकर: इस ग्रन्थ की रचना पं. सारंगदेव ने की थी ।
* पं. विष्णुनारायण भातखंड ने ‘संगीत रत्नाकर’ को भारतीय संगीत का सबसे अधिक प्रमाणिक ग्रन्थ माना है ।
* संगीत के अंगों को समझने के लिए यह बेजोड़ माना जाता है ।
(3) संगीत पारिजात: इस ग्रन्थ की रचना सन् 1665 में पंडित अहोबल ने की थी ।
* उन्होंने प्रत्येक राग अन्य राग से अलग होने तथा उसका स्वतंत्र अस्तित्व तथा विशेषता होने को समझाया है ।
* इसमें 29 प्रकार के स्वरों का वर्णन है ।
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निम्नलिखित विधानों के कारण स्पष्ट कीजिए:
प्रश्न 1.
विविधता विश्व में भारत की अमीट छाप है ।
उत्तर:
भारत की सर्वव्यापक और सबको समाविष्ट करनेवाली है ।
प्राचीन काल से वर्तमान काल तक विविध जातियों का आगमन और परिवर्तन के अनुसार हस्तकला, गृह कारीगरों, चित्र तथा नृत्य कला सहित विविध ललितकलाओं का समावेश होता है । ये भारत की वैविध्य विरासत का दर्शन कराते है और विश्व में भारत की अमीट छाप छोड़ते है ।
प्रश्न 2.
हस्तकला भारत की एक महत्त्वपूर्ण पहचान है ।
उत्तर:
भारतीय सांस्कृतिक विरासत का सौंदर्य भारतीय कारीगरों का हुन्नर परंपरा में समाया हुआ है ।
भारत के सामूहिक जीवन को उन्होंने, उनकी कला-कारीगरी और हुन्नर उद्योग द्वारा कुशलता विकसीत की है ।
भरत गूंथन काष्ठकला, मिट्टी कला, धातुकाम, चित्रकला, चर्म उद्योग, मीना कारीगरी, नक्काशीकार्य, अकीक और हीरे से संलग्न कौशल्यपूर्ण कारीगरी, शिल्प-स्थापत्य, हस्तकला से जुड़े कार्यों ने भारत की एक महत्त्वपूर्ण पहचान दी है ।
निम्नलिखित विषयों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:
प्रश्न 1.
रास नृत्य:
उत्तर:
रास अर्थात् गोलाकार घूमकर नृत्य के साथ घूमना ।
हमारे यहाँ नरसिंह मेहता ने रासलीला बतायी थी ऐसी कथा है ।
गुजरात में अधिकांशतः नवरात्रि तथा जन्माष्टमी जैसे त्यौहारों में रास खेला जाता है ।
रास का एक प्रकार दांडिया रास है परंतु गागर और हाँडी लेकर भी रास किया जाता है ।
वैष्णव संप्रदाय का प्रभाव बढ़ने से रास नृत्य का प्रभाव अधिक बढ़ा है ।
रास खेलने में स्त्रियाँ भरत परे हुए चणिया-चोली और पुरुष केडिया-धोती की परंपरागत पोशाक है ।
प्रश्न 2.
मणिपुरी नृत्य:
उत्तर:
मणिपुरी प्रजा प्रत्येक उत्सव पर नृत्य करती है ।
मणिपुरी नृत्य शैली मुख्यत: श्रीकृष्ण की बाललीला और रासलीला पर आधारित है ।
मणिपुरी नृत्य के लास्य और तांडव ये दो प्रकार है ।
इस नृत्य के समय रेशम का ब्लाऊज पहनकर कमर पर पट्टा बाँधा जाता है तथा नीचे घेरदार हरे रंग की चणिया ‘कुमान’ पहनते है ।
गुरु आमोबीसिंग, आतोम्बोसिंग, गुरु विपिन सिन्हा, नयना झवेरी, निर्मल मेहता आदि ने इस नृत्य को प्रसिद्ध किया है ।
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प्रश्न 3.
धातुकला का प्राचीन काल में विकास:
उत्तर:
पाषाणयुग के बाद धातुकला का विकास हुआ था ।
लोथल के कारीगर धातुओं से बने दांतरे, करवत, आरी, सूई जैसी काँसे और तांबे के औजार बनाते थे ।
इसके उपरांत धातु के औजार, बर्तन, मूर्तियाँ और पात्र बनाते थे ।
युद्धों के लिए शस्त्र भी धातु से बनते थे ।
सोने-चाँदी जैसे धातुओं के उपयोग गहनों में होता था । ताँबा, पीतल, काँसे जैसी धातुओं का उपयोग बर्तन और मूर्तियाँ बनाने में तथा लोहे का उपयोग औजारों और हथियारों के निर्माण में होता था ।
प्रश्न 4.
भरतनाट्यम्:
उत्तर:
भरतनाट्यम् का उदभव स्थान तमिलनाडु का तांजोर जिला है ।
भरत मुनि द्वारा रचित ‘नाट्यशास्त्र’ और नंदिकेश्वर द्वारा रचित ‘अभिनव दर्पण’ भारत नाट्यम् पर आधारित ग्रन्थ है ।
मृणालिनी साराभाई, गोपीकृष्ण, अभिनेत्री हेमामालिनी, वैजयन्तिमाला मुख्य नृत्यकार है ।
प्रश्न 5.
अकीक काम:
उत्तर:
नदी घाटी प्रदेशों में पाया जानेवाला एक कीमती पत्थर अकीक होता है । उसमें अकीक, चकमक और अर्द्धपारदर्शक सुन्दर लाल पत्थर मुख्य है ।
विशेषकर सिलिकायुक्त – मिश्रित भूरे और सफेद रंग का पत्थर अकीक होता है ।
गुजरात में अहमदाबाद, सुरत, खंभात और राणपुर क्षेत्रों से अकीक प्राप्त होता है ।
अकीक का उपयोग अलंकारों में जड़ने के लिए खंभात में होता है ।
खंभात के कारीगर अकीक को विभिन्न जेवरातों में जड़नेलायक बनाते है । इससे माला और मणके भी बनते है ।
प्रश्न 6.
गुजरात में भरत-गूंथन कला:
उत्तर:
कपड़े पर भरत-गूंथन कार्य गुजरात में कच्छ, सौराष्ट्र आदि में स्त्रियों का गृह व्यवसाय है ।
चंदरवा, शान तोरण, चाकला, ओछाड, तकिया, पारणा के उपरांत केडिया नामक वस्त्रों पर भरत-गूंथन की कला की परंपरा आज भी प्रसिद्ध है।
भरत-गूंथन से सज्जे गादले, रजाई पर भौमितिक और विविध आकृति प्रधान कृतियों के साथ भी पाया जाता है ।
कच्छ के बन्नी क्षेत्र में ‘जत’ जाति भरत कला के लिए विशेष प्रसिद्ध है ।
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